[ यह लेख दैनिक हिन्दुस्तान के संपादकीय पन्ने पर 13 जनवरी 2020 के छपा है। ] —– ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग उन्हीं आर्थिक नीतियों का परिणाम है जो दुनिया जलवायु परिवर्तन की त्रासदी दे रही हैं —– –… Read More ›
Climate Change
कुछ लाख रसोइये चाहिए
[ लेख ‘गांधी मार्ग’ के जुलाई-अगस्त २०१२ अंक में छपा है ] सौंदर्य केवल लघु होने से नहीं आता। ‘स्मॉल इज़ ब्यूटीफुल’ का पाठ पढ़ाने वाले हमारे पर्यावरण वाले भूल जाते है कि प्रकृति लघु ही नहीं, अति सूक्ष्म रचना… Read More ›
Durban: A short-term victory for a long-term loss
When the time comes to prepare a climate treaty in 2015, based on the Durban declaration, India will plough a lone furrow By Sopan Joshi [ Published in Tehelka ] INDIA EXCHANGED a tactical victory for a strategic defeat at… Read More ›
जलवायु परिवर्तन: भोग और विलास का रोग
इस हफ्ते डरबन में हो रही सालाना बहसबाजी प्रतियोगिता हमें प्रलय से नहीं बचाएगी। पर शायद गरीबी से निकलने वाली सामाजिकता हमें बचा ले [ लेख का संपादित अंश दैनिक भास्कर की पत्रिका रसरंग में छपा था। मूल लेख… Read More ›
चौमासा मीमांसा: बदलते मॉनसून के लक्षण
(यह लेख १० जुलाई को दैनिक भास्कर की रविवारी मैगजीन में सम्पादित रूप में छपा है|) हमारे भविष्य में जितनी बाढ़ है उतना ही सूखा भी। पूर्वानुमान लगाना दूभर होता जा रहा है – सोपान जोशी सोमवार 11 जुलाई को… Read More ›
Mercurial Monsoon
The famously capricious rains are reinforcing their reputation every year. Our planners need to take a hand in this Act of God By SOPAN JOSHI Its semantic density is comparable to that of a block of reinforced concrete. The India… Read More ›